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महिलाओं, बच्चों और परिवारों का समर्थन करने वाली वैश्विक दवा नीतियों की

मांग करने वाली महिलाओं की घोषणा (वुमेन्स डिक्लेरेशन)

नशीली दवाओं पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के विशेष सत्र (UNGASS) के अवसर पर लैंगिक समानता की दिशा में काम करने वाले दुनिया भर के संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ऐसी दंडात्मक दवा नीतियों को खत्म करने की मांग की है जो महिलाओं, बच्चों और परिवारों के अधिकार, स्वास्थ्य और कल्याण के लिए खतरा बनती हैं।

नशे की लत को "व्यक्ति के लिए एक गंभीर बुराई" और "मानव जाति के लिए सामाजिक एवं आर्थिक खतरा" बताने वाले नारकोटिक्स ड्रग्स पर एकल कन्वेंशन को अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा अपनाए जाने के 50 से अधिक वर्षों के बाद, हमारी समझ विकसित हुई है। जैसा कि दवा नीति पर ग्लोबल कमीशन द्वारा मान्य किया गया है:

नशीली दवाओं पर वैश्विक संघर्ष विफल रहा है जिसके दुनिया भर के लोगों और समाज के लिए विनाशकारी परिणाम निकलते हैं. . . ऐसे में राष्ट्रीय और वैश्विक दवा नियंत्रण नीतियों में मूलभूत सुधारों की तत्काल जरूरत है।

दंडात्मक नशीली दवा नियंत्रण नीतियां खास तौर पर महिलाओं और परिवारों के मामले में नाकाम रही हैं। मौजूदा वैश्विक दवा नियंत्रण व्यवस्था ऐसे कानूनों और प्रथाओं को संस्थागत रूप देती है जो महिलाओं को अशक्त करने और महिलाओं की समानता के मौलिक सिद्धांतों एवं मूल्यों का उल्लंघन करने का काम करती हैं।

हम समझते हैं कि:

  • सजा पर ध्यान केंद्रित करने से न तो नशीली दवाओं का प्रयोग कम हुआ है और न ही नशीली दवाओं के व्यापार का सफाया हुआ है। इसके बजाय, निषेध और परिणामी दंडात्मक नीतियां नशीली दवाओं के व्यापार को अधिक लाभदायक तथा और अधिक खतरनाक बना देती हैं, और इसने सरकारों को ऐसी महिलाओं को गंभीर रूप से दंडित करने का अधिकार प्रदान किया है जिनकी भूमिका अवैध नशीली दवाओं की अर्थव्यवस्था में अक्सर उपभोक्ताओं या निम्न स्तर के विक्रेताओं के रूप में होती है, जो अक्सर अपने परिवारों के लिए आजीविका की व्यवस्था करने की जरूरत से प्रेरित होती हैं।
     
  • छोटे-मोटे, मादक पदार्थों से संबंधित अपराधों के लिए महिलाओं को क़ैद किये जाने की विश्वव्यापी दर खतरनाक ढ़ंग से बढ़ रही है।दंडात्मक दवा नीतियों का महिलाओं पर तेजी से प्रभाव पड़ रहा है और महिलाओं को कैद किये जाने की दर - खास तौर पर जातीय, नस्लीय, धार्मिक और लैंगिक अल्पसंख्यकों की दर - अभूतपूर्व गति से बढ़ रही है।
  • महिलाओं को कैद किये जाने से बच्चों को अपनी माताओं से अलग होना पड़ता है। मादक पदार्थों से संबंधित अपराधों के लिए दुनिया भर की जेलों में बंद महिलाओं की एक बहुत बड़ी संख्या ऐसी ही माताओं की है। सजा पर ध्यान केंद्रित करने वाली दवा नीतियां न केवल महिलाओं को उनकी स्वतंत्रता से वंचित करती हैं, बल्कि उन बच्चों के कल्याण से भी समझौता किया जाता है जिन्हें जबरन उनकी माताओं से अलग होना पड़ता है या उनके साथ जेल में बंद कर दिया जाता है। उत्तरोत्तर, नशीली दवाओं के प्रयोग की एक प्रतिक्रिया के रूप में सजा के मामले में बच्चों को अलग किया जाना और पैतृक अधिकारों को समाप्त करना भी शामिल होता है।
     
  • महिलाओं को मादक पदार्थों से जुड़े निम्न स्तरीय अपराधों के लिए गैर-आनुपातिक और अनुचित सजा मिलती है। मौजूदा वैश्विक दवा नीतियों के तहत बढ़ने वाले मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े संगठन अक्सर महिलाओं की गरीबी और उनके द्वारा अपने परिवारों की आजीविका की व्यवस्था करने की जरूरत का लाभ उठाते हैं, उदाहरण के लिए, अवैध मादक पदार्थों को अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार पहुंचाने के लिए महिलाओं को प्रलोभन देना। फिर महिलाओं को अपने स्वयं के नेतृत्व या उस व्यापार में संलग्न होने के बजाय नशीली दवाओं के अवैध व्यापार में शामिल अन्य लोगों के साथ अपने संबंधों के आधार पर कानूनी कार्रवाई का सामना करना या जेल जाना पड़ता है।
     
  • नशीली दवाओं का सेवन करने वालों और छोटे पैमाने के विक्रेताओं को क़ैद किये जाने से महिलाओं और परिवारों की आर्थिक सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न होता है। चूंकिइस बात की संभावना सबसे अधिक रहती है कि महिलाएं अपने परिवारों के लिए प्राथमिक देखभालकर्ता हैं, उनको अपराधी ठहराए जाने से गरीबी का एक ऐसा चक्र बनता है जो स्वास्थ्य, आजीविका और राजनीतिक अधिकारों तक महिलाओं की पहुंच में बाधा उत्पन्न करता है और सामाजिक एवं आर्थिक दोनों तरीकों से परिवारों की स्थिरता खतरे में पड़ जाती है।
     
  • गुमराह दवा नीतियों द्वारा लगने वाला कलंक और गलत जानकारी महिलाओं की स्थिति को कमजोर करती है।वैश्विक दवा नीतियां कैद में डाले जाने, उपचार की सुविधाओं में अनैच्छिक निरोध, जबरन इलाज करने या दवा बंद करने और प्रतिबंध लगाए जाने का कारण बनी हैं। इस तरह के दंड में गैर-आनुपातिक रूप से वंचित महिलाओं को, ख़ास तौर पर गरीब महिलाओं और कुछ जातीय तथा नस्लीय वर्गों के सदस्यों को निशाना बनाया जाता है। ऐसी नीतियां सामाजिक कलंक, तिरस्कार और भेदभाव को बढ़ावा देती हैं, चाहे औपचारिक दंड दिया गया हो या नहीं। गर्भवती और बच्चों की परवरिश करने वाली महिलाओं को ख़ास तौर पर प्रसव से पूर्व नशीली दवाओं के इस्तेमाल से होने वाले संबंधित जोखिमों को बढ़ा-चढ़ाकर और गलत तरीके से बताए जाने वाले अभियानों द्वारा कलंकित किया जाता है।
     
  • महिलाएं अधिकतर हिंसा की चपेट में आती हैं और जब नशीली दवाओं को नियंत्रित करने वाली नीति सजा पर केंद्रित होती है तो ऐसी हिंसा को चुनौती देने के विकल्प नहीं बचते हैं। इस विश्वव्यापी मान्यता के साथ कि लिंग-आधारित हिंसा विविध रूपों में एक महामारी है, वैश्विक दवा नीतियों ने सिर्फ इस खतरे को बढ़ावा देने और अधिक से अधिक महिलाओं को हिंसा की चपेट में लाने का काम किया है। महिलाओं को नशीली दवाओं के व्यापार में शामिल लोगों और नशीली दवाओं के कानूनों को लागू करने के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों द्वारा तस्करी, दुर्व्यवहार और यौन उत्पीड़न का शिकार बनाया जाता है।
     
  • फसल उन्मूलन अभियान महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य को खतरे में डालते हैं। आपूर्ति-पक्ष के हस्तक्षेप नशीले पदार्थों की खेती और उत्पादन को समाप्त करने में अप्रभावी साबित हुए हैं। इसके बजाय, ये बड़े पैमाने पर पर्यावरण के विनाश को बढ़ावा देते हैं। फसल उन्मूलन की प्रथाएं जैसे डीफोलिएंट का हवाई छिड़काव उन स्थानों पर काम करने वाली महिलाओं और बच्चों के लिए, जो इस धुंए के प्रभाव क्षेत्रों में काम करते हैं, कैंसर और प्रजनन संबंधी नुकसानों सहित अन्य बीमारियों का कारण बनती हैं।
     
  • नशीली दवा की वैश्विक नीतियां जिनके परिणाम स्वरूप महिलाओं के खिलाफ हिंसा होती है और उनकी आजीविका का नुकसान होता है, बाध्यकारी प्रवास के माध्यम से शरणार्थियों का एक वर्ग उत्पन्न कर रही हैं। फसल उन्मूलन जिसने लोगों की आजीविका को समाप्त किया है और नशीली दवाओं पर प्रतिबंध लगाने वाली लगातार सैन्यीकृत होती नीतियों से बढ़ने वाली निरंतर हिंसा ने महिलाओं को सुरक्षा और अवसर की तलाश में पलायन करने के लिए प्रेरित किया है। जब महिलाएं सीमाओं के पार पलायन करती हैं, वे प्रभावी ढंग से राज्यविहीन हो जाती हैं और अपनी स्थिति के परिणाम स्वरूप शोषण, यौन हिंसा, शारीरिक उत्पीड़न, बच्चों से अलगाव का दंश झेलती हैं तथा निष्कासन, कारावास और अन्य दंडों की चपेट में आ जाती हैं।
  • महिलाएं प्रभावी और उचित दवाओं से उपचार की मांग में भेदभाव और सजा पाने के जोखिम का सामना करती हैं। जब महिलाएं इस बात का खुलासा करती हैं कि वे गर्भवती हैं, उन्हें उचित दवाओं के उपचार का लाभ उठाने में काफी बाधाओं का सामना करना पड़ता है जिनमें बच्चों के देखभाल का अभाव, ट्रॉमा-सूचित देखभाल का अभाव और गिरफ्तारी के खतरे शामिल हैं। दवाओं के उपचार सहित भेदभाव रहित स्वास्थ्य की देखभाल का लाभ उठाए बिना महिला के एचआईवी या हेपेटाइटिस-सी होने, बेघर होने का अनुभव करने, दवाओं की अत्यधिक खुराक और परिवार में काफी दरार उत्पन्न होने की संभावना बढ़ जाती है।
     
  • मादक पदार्थों का सेवन करने वाली महिलाओं को नसबंदी और गर्भपात संबंधी अभियानों के लिए लक्षित किया जाता है। गर्भवती महिलाओं द्वारा नशीली दवाओं के प्रयोग से होने वाले नुकसान से जुड़े जोखिमों, ऐसी महिलाओं की बच्चों की परवरिश करने की क्षमता और उनके बच्चों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के बारे में झूठी जानकारी देने और अपमानित करने के तरीके का इस्तेमाल सिर्फ कुछ महिलाओं को गर्भवती होने या बच्चों की परवरिश करने से रोकने के लिए किया जाता है। इसके अलावा गर्भधारण के दौरान नशीली दवाओं का सेवन करने वाली महिलाओं को दंडित करने वाली नीतियां भी गिरफ्तारी या हिरासत में लिए जाने से बचने के एक साधन के रूप में गर्भधारण समाप्त करने के लिए महिलाओं पर दबाव डालती हैं।        

इस तरह की विफलताओं के लिए महिलाओं को भारी कीमत चुकानी पड़ती है। लगभग हर देश में दंडात्मक दवा नीतियों का ऐसी महिलाओं पर काफी प्रभाव पड़ता है जो गरीबी, शारीरिक एवं यौन हिंसा के इतिहास, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी अनुपचारित चिंताओं, अपर्याप्त समर्थन प्रणालियों और जाती या नस्लीयता के कारण हाशिये पर किये जाने जैसी समस्याओं का सामना कर रही हैं। जब भविष्य की ओर देखते हैं, हमारे पास इस बात पर पुनर्विचार करने का अवसर है कि नशीली दवाओं का सेवन करने वाली, मादक पदार्थों की बिक्री करने वाली या ऐसा करने से जुड़ी महिलाओं के उपचार और उनके कल्याण का काम कैसे पूरा किया जाए।

इसलिए हम नीति-नियंताओंसे मादक पदार्थों के वैश्विक निषेध से होने वाले अन्याय को समाप्त करने और इसके बजाय विज्ञान, संवेदना और मानव अधिकारों का समर्थन करने वाली नशीली दवा नीतियों की मांग करते हैं जिसके लिए निम्नलिखित कदम उठाया जाना चाहिए:                                               

  1. मादक पदार्थों से संबंधित सभी कन्वेंशनों, घोषणाओं और रिपोर्टों में एक लैंगिक विश्लेषण शामिल करना।
  2. ऐसी सामाजिक और आर्थिक स्थितियों के उन्मूलन को प्राथमिकता देना जो समस्या उत्पन्न करने वाली दवाओं की भागीदारी में योगदान करती है।
  3. नशीली दवाओं के समस्या उत्पन्न करने वाले उपयोग को एक स्वास्थ्य संबंधी समस्या के रूप में देखना और स्वास्थ्य संबंधी सहायक उपायों के लिए संसाधन बढ़ाना।
  4. नशीली दवाओं से जुड़े अपराधों के लिए क़ैद और सजा के प्रयोग को खत्म करना। क़ैद को एक दुर्लभ और महंगे संसाधन के रूप में देखा जाना चाहिए जिसका प्रयोग केवल ऐसे व्यक्तियों के लिए होना चाहिए जो सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बनते हैं और फिर केवल इस खतरे को दूर करने के लिए पर्याप्त उचित समय तक ऐसा किया जाना चाहिए। गर्भवती और बच्चों की परवरिश करने वाली महिलाओं को कैद किये जाने का मामला दुर्लभ और असाधारण होना चाहिए।
  5. दोषी ठहराए जाने के बाद ऐसे प्रतिबंधों को समाप्त करना जो नशीली दवाओं से जुड़े अपराधों के दंडात्मक प्रभाव को बढ़ा देते हैं। इस तरह के प्रतिबंध अक्सर एक दी गयी सजा या दंड से इतर जाते हैं और महिलाओं, बच्चों तथा परिवारों को हाशिए पर डाल देते हैं।
  6. यह सुनिश्चित करना कि सभी दवा उपचार सेवाएं साक्ष्य आधारित हैं और विशेष रूप से गर्भावस्था एवं बच्चों की परवरिश के दौरान महिलाओं की विशिष्ट चिकित्सकीय, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक जरूरतों को पूरा करती हैं।        
  7. महिलाओं, बच्चों और परिवारों पर दंडात्मक दवा नीतियों के प्रभावों का अनुसंधान करना और नीति-निर्धारण की प्रक्रिया को जानकार बनाने तथा इसमें सुधार करने के लिए इसका इस्तेमाल करना।        
  8. नीति में और कार्यक्रम के नियोजन, कार्यान्वयन एवं मूल्यांकन में नशीली दवाओं का सेवन करने वाली महिलाओं को सार्थक ढ़ंग से शामिल करना।